वक़्त ही हे जो चला जा रहा है!
क्या सोचा था, क्या होता जा रहा है!
मेरा तो सही न आज था, न कल है!
तू बता, तेरा क्या हाल है?
कोष ना तू खुद को
ना कोशु में मुझे,
खेल हे ये मुक्कदर का.
समज.
सही-गलत किसे सूजे?
युहीं नहीं चमकते सितारे आसमान में,
कोई तो होगा ख्याल रखने वाला.
ये जो बचे कूचे हे पल जिंदगी के,
कुछ में तूझे याद करके जी लू,
कुछ तू मुझे याद करके बिता.
कभी फुर्सद मिले तो याद भी कर लिया कर.
हे नहीं रिश्ता तो क्या गम,
दो घडी तेरा साथ ही मिल जायेगा.
तुजे कुछ विराम,
तो मुझे कुछ शुकुन मिल जायेगा.
एक बेचैनी लगी रहती है इस दिल को,
सोचता रहता हे की तेरा क्या हाल है?
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